Striyo ka Vedaddhyan aur Vedic Karmakand me Adhikar (Paper Back)
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यह पुस्तक उन लोगों के लिए एक करारा जवाब है जो महिलाओं को वेदों के अध्ययन और वैदिक कर्मकांडों से दूर रखना चाहते हैं। पंडित धर्मदेव विद्यामार्तण्ड द्वारा लिखित यह पुस्तक वेदों के ठोस प्रमाणों के साथ यह सिद्ध करती है कि महिलाओं को वेदों को पढ़ने और वैदिक अनुष्ठानों में भाग लेने का पूरा अधिकार है। यह पुस्तक महिलाओं के लिए एक वरदान है।
- वेदों के आधार पर महिलाओं के अधिकारों का समर्थन।
- महिलाओं के वेदाध्ययन पर लगाई गई पाबंदियों का खंडन।
- वैदिक कर्मकांडों में महिलाओं की भागीदारी के प्रमाण।
Description
“स्त्रियों का वेदाध्यन और वैदिक कर्मकाण्ड में अधिकार” एक क्रांतिकारी पुस्तक है जो समाज में फैली उन भ्रांतियों को दूर करती है जिनके कारण महिलाओं को वेदों के ज्ञान से वंचित रखा गया है। पंडित धर्मदेव विद्यामार्तण्ड ने इस पुस्तक में वेदों, शास्त्रों और आर्य ग्रंथों से ऐसे अकाट्य प्रमाण दिए हैं जो यह साबित करते हैं कि वैदिक काल से ही महिलाओं को वेद पढ़ने और सभी धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने का अधिकार प्राप्त था।
यह पुस्तक उन सभी तर्कों और मान्यताओं का जोरदार खंडन करती है जो यह दावा करते हैं कि महिलाएं वेद नहीं पढ़ सकतीं। लेखक ने वेदों के मंत्रों और ऐतिहासिक उदाहरणों के माध्यम से दिखाया है कि वैदिक युग में गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी कई विदुषी महिलाएं थीं जिन्होंने वेदों का गहरा अध्ययन किया और ऋषि-मुनियों के साथ शास्त्रार्थ में भाग लिया।
यह पुस्तक न केवल महिलाओं को उनके वैदिक अधिकारों से अवगत कराती है, बल्कि उन्हें अपनी आध्यात्मिक यात्रा में सशक्त बनाती है। यह हर उस व्यक्ति के लिए एक आवश्यकW पठनीय है जो लैंगिक समानता और धार्मिक स्वतंत्रता में विश्वास रखता है और वैदिक ज्ञान को सबके लिए सुलभ बनाना चाहता है।
मुख्य विशेषताएँ:
- लेखक: पं. धर्मदेव विद्यामार्तण्ड
- भाषा: हिंदी
- प्रकाशक: हितकारी प्रकाशन समिति
- मूल्य: ₹40
- SKU: 19051
यह पुस्तक उन सभी के लिए एक अमूल्य धरोहर है जो वैदिक ज्ञान, सामाजिक सुधार और आत्म-ज्ञान की खोज में हैं। ₹40 की विशेष कीमत पर, यह वैचारिक क्रांति का द्वार आपके लिए खुला है।

















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