ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका Rigvedadi Bhashya Bhumika – by Swami Dayanand Sarswati (स्वामी दयानन्द सरस्वती ) (Paper Back)
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यह पुस्तक ‘ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका’ महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा रचित एक मौलिक और अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो वेदों के गूढ़ रहस्यों को समझने की कुंजी है। यह वेदों का परिचय कराती है और बताती है कि कैसे वेदों का अध्ययन किया जाना चाहिए। यह संस्कृत और हिंदी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे वैदिक ज्ञान तक सभी की पहुँच आसान होती है।
- वेदों को समझने की आधारशिला और उनका विस्तृत परिचय।
- महर्षि दयानंद सरस्वती की वेदों पर अद्वितीय व्याख्या।
- वैदिक सिद्धांतों और ज्ञान को सरल भाषा में प्रस्तुत करती है।
Description
“ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका” महर्षि दयानंद सरस्वती की एक कालजयी रचना है, जिसे वेदों के अध्ययन के लिए एक अनिवार्य प्रारंभिक ग्रंथ माना जाता है। इस पुस्तक में, महर्षि दयानंद ने वेदों के वास्तविक अर्थ और उनके महत्व को स्पष्ट किया है, उन भ्रांतियों को दूर किया है जो वेदों के संबंध में फैल गई थीं। यह ग्रंथ बताता है कि वेद सभी सत्य विद्याओं का स्रोत हैं और कैसे उनका सही ढंग से अध्ययन किया जाना चाहिए।
पुस्तक वेदों के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालती है, जिनमें सृष्टि की उत्पत्ति, ईश्वर का स्वरूप, धर्म के सिद्धांत, सामाजिक व्यवस्था और मानव जीवन के उद्देश्य शामिल हैं। यह वेदों के मंत्रों और सिद्धांतों की गहन व्याख्या प्रस्तुत करती है, जिससे पाठक वैदिक ज्ञान को गहराई से समझ पाते हैं।
“ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका” उन सभी के लिए एक अमूल्य संसाधन है जो वैदिक धर्म, दर्शन और संस्कृति को समझना चाहते हैं। यह 455 पृष्ठों की हार्डकवर पुस्तक 2020 में प्रकाशित हुई थी और यह संस्कृत और हिंदी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है, जो इसे व्यापक पाठक वर्ग के लिए सुलभ बनाती है।
मुख्य विशेषताएँ:
- भाषा: हिंदी
- मूल्य: ₹200
यह पुस्तक उन सभी के लिए एक अमूल्य धरोहर है जो वैदिक ज्ञान, सामाजिक सुधार और आत्म-ज्ञान की खोज में हैं। ₹200 की विशेष कीमत पर, यह वैचारिक क्रांति का द्वार आपके लिए खुला है।


















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