परिचय
वैदिक ज्ञान और सामाजिक सुधार का सशक्त केंद्र
आर्य समाज, महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में मुंबई में स्थापित, एक ऐसा आंदोलन है जो वैदिक ज्ञान के पुनरुत्थान, सामाजिक सुधार और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित है। महर्षि दयानंद सरस्वती, एक महान समाज सुधारक और वैदिक विद्वान, ने भारत की प्राचीन वैदिक संस्कृति को आधुनिक संदर्भ में पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया। उन्होंने अंधविश्वास, सामाजिक कुरीतियों और धार्मिक पाखंडों के खिलाफ एक सशक्त आवाज उठाई, और वेदों के शुद्ध ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया।
|| हमारे सिद्धांत ||
आर्य समाज के मूल सिद्धांत वेदों पर आधारित हैं, जिन्हें हम ज्ञान का सर्वोच्च स्रोत मानते हैं। हम एक ईश्वर में विश्वास करते हैं, जो निराकार, सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापी है। हम मूर्ति पूजा, अवतारवाद और अंधविश्वासों का विरोध करते हैं। हमारा आदर्श वाक्य है "कृण्वन्तो विश्वमार्यम्" (विश्व को आर्य बनाते चलो), जो हमें मानवता की सेवा और समाज के उत्थान के लिए प्रेरित करता है।
|| हमारे कार्य ||
- शिक्षा: आर्य समाज ने डीएवी (दयानंद एंग्लो वैदिक) स्कूलों और कॉलेजों की स्थापना करके शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हमारी शिक्षा प्रणाली आधुनिक ज्ञान और वैदिक मूल्यों का समन्वय करती है, जिससे छात्रों का सर्वांगीण विकास होता है। हमारे 400 से अधिक गुरुकुल आवासीय शिक्षा प्रणाली पर काम कर रहे हैं।
- सामाजिक सुधार: हमने जातिवाद, छुआछूत, बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। हमने विधवा पुनर्विवाह और महिला शिक्षा को बढ़ावा दिया है, और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए काम किया है।
- धार्मिक सुधार: हमने वेदों के शुद्ध ज्ञान को फैलाने और धार्मिक पाखंडों को दूर करने का प्रयास किया है। हम वैदिक यज्ञों और संस्कारों को सरल और सुलभ बनाने के लिए काम करते हैं।
- सेवा कार्य: आर्य समाज अनाथालयों, अस्पतालों, गौशालाओं और वृद्धाश्रमों का संचालन करता है। हम प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्य भी करते हैं, और जरूरतमंदों की सहायता के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। हमारे 1500 से अधिक चिकित्सालय मानव सेवा के लिए काम कर रहे हैं। 20,000 से अधिक अनाथ बच्चों के पालन पोषण के लिए अनाथालय चलाए जा रहे हैं।
- वैदिक संस्कृति का प्रचार: हम वैदिक संस्कृति और मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए व्याख्यान, सेमिनार और सम्मेलनों का आयोजन करते हैं।
- युवा विकास: आर्य वीर दल के माध्यम से युवाओं के शारीरिक और नैतिक विकास के लिए व्यायामशालाओं का संचालन किया जाता है और आवासीय शिविरों का आयोजन होता है।
- आदिवासी उत्थान: आदिवासी क्षेत्रों में स्कूलों का संचालन किया जाता है ताकि लाखों आदिवासियों को शिक्षा मिल सके।
- महिला सशक्तिकरण: महिलाओं को लघु व्यवसाय चलाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है।
|| हमारा संगठन ||
हम एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहते हैं जो वैदिक मूल्यों पर आधारित हो, जहां सभी लोग सद्भाव और समानता के साथ रहें। हम एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना चाहते हैं जो सशक्त, समृद्ध और न्यायपूर्ण हो।
|| हमारा मिशन ||
- वेदों के शुद्ध ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाना।
- सामाजिक बुराइयों को दूर करना और समाज का उत्थान करना।
- शिक्षा और सेवा के माध्यम से मानवता की सेवा करना।
- वैदिक संस्कृति और मूल्यों को बढ़ावा देना।
- युवाओं को सशक्त बनाना और उन्हें राष्ट्र निर्माण में योगदान करने के लिए प्रेरित करना।
|| हमारा भविष्य ||
आर्य समाज 150 वर्षों से समाज की सेवा में समर्पित है, और हम आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अपने कार्यों को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम वैदिक ज्ञान और सामाजिक सुधार के माध्यम से एक बेहतर भविष्य का निर्माण करना चाहते हैं। 29-30 मार्च 2025 को होने वाला महासम्मेलन समाज को एक नई दिशा प्रदान करेगा।
|| जुड़ें हमसे ||
हम आपको आर्य समाज के आंदोलन में शामिल होने और हमारे मिशन में योगदान करने के लिए आमंत्रित करते हैं। आप हमारे स्थानीय आर्य समाज में शामिल हो सकते हैं, हमारे कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं, या हमारी वेबसाइट के माध्यम से हमसे संपर्क कर सकते हैं।
|| मान्यताएँ ||
आर्य समाज वेदों को सत्य ज्ञान का मूल स्रोत मानता है, जो ईश्वर द्वारा प्रदत्त है। हम एक निराकार, सर्वव्यापी ईश्वर में विश्वास रखते हैं, जो सृष्टि का रचयिता और पालक है। मूर्तिपूजा, अवतारवाद और अंधविश्वासों का खंडन करते हुए, हम वैदिक यज्ञों और संस्कारों को शुद्ध रूप में अपनाने पर बल देते हैं। हमारा दृढ़ विश्वास है कि कर्मफल सिद्धांत के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्मों के लिए उत्तरदायी है। हम सामाजिक समानता, न्याय और मानवता की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं, और "कृण्वन्तो विश्वमार्यम्" के आदर्श पर चलते हुए विश्व को श्रेष्ठ बनाने का संकल्प लेते हैं।