Dalitodhar Ki Aad Me (Paper Back)
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यह पुस्तक ‘दलितोद्धार की आड़ में’ उन भ्रांतियों और षड्यंत्रों का पर्दाफाश करती है जो दलित समाज के उत्थान के नाम पर फैलाए गए हैं। लेखक राजेशाचार्य आट्टा ने इस पुस्तक में तथ्यों और तर्कों के साथ यह सिद्ध किया है कि किस प्रकार कुछ निहित स्वार्थी तत्वों ने दलितों को धर्म और संस्कृति से दूर करने का प्रयास किया है।
- दलितों के नाम पर होने वाली राजनीति और षड्यंत्रों का खुलासा।
- समाज सुधारकों के वास्तविक योगदान का विश्लेषण।
- आर्य समाज के सिद्धांतों के आलोक में सामाजिक समरसता का मार्ग।
Description
‘दलितोद्धार की आड़ में’ राजेशाचार्य आट्टा द्वारा लिखित एक महत्वपूर्ण कृति है जो समाज में फैले उन भ्रमों को दूर करती है जो दलितों के उत्थान के नाम पर फैलाए गए हैं। यह पुस्तक उन सभी दावों को चुनौती देती है जो दलितों को हिंदू धर्म से अलग करने और उन्हें बांटने के लिए किए जाते हैं।
पुस्तक में, लेखक ने स्वामी दयानंद सरस्वती, लाला लाजपत राय, वीर सावरकर और डॉ. हेडगेवार जैसे महान समाज सुधारकों के विचारों और कार्यों पर प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया है कि कैसे इन सभी ने समाज के हर वर्ग को एक साथ लाने और सामाजिक समरसता स्थापित करने के लिए काम किया। यह पुस्तक दिखाती है कि इन महापुरुषों का उद्देश्य दलितों को सशक्त बनाना था, न कि उन्हें धर्म और राष्ट्र से विमुख करना।
राजेशाचार्य आट्टा ने दलितों के नाम पर होने वाली राजनीति, धर्म परिवर्तन के षड्यंत्रों और जातिवाद को बढ़ावा देने वाले तत्वों के असली चेहरे को उजागर किया है। यह पुस्तक न केवल एक ऐतिहासिक और सामाजिक विश्लेषण है, बल्कि यह आर्य समाज के ‘वेदों की ओर लौटो’ के सिद्धांत को भी प्रस्तुत करती है, जो सभी को समानता और एकता के सूत्र में बांधता है। यह उन सभी लोगों के लिए एक आवश्यकW पठनीय है जो सामाजिक सच्चाई और इतिहास को समझना चाहते हैं।
मुख्य विशेषताएँ:
- लेखक: राजेशाचार्य आट्टा
- भाषा: हिंदी
- प्रकाशक: रचना प्रकाशन
- मूल्य: ₹50
- SKU: 04086
यह पुस्तक उन सभी के लिए एक अमूल्य धरोहर है जो वैदिक ज्ञान, सामाजिक सुधार और आत्म-ज्ञान की खोज में हैं। ₹50 की विशेष कीमत पर, यह वैचारिक क्रांति का द्वार आपके लिए खुला है।

















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