जानिए आखिर धर्म क्या है? | धर्म का वास्तविक अर्थ | What is Dharma?
[संगीत] ओम यो भूत च भव्य च सर्वम यष्टते स्वरस च केवलम तस्मैाय ब्रहण नमः प्रिय श्रोताग आज हम एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करते हैं। वह विषय यदि संसार के मनुष्यों की समझ में आ जाए तो यह संसार स्वर्ग बन सकता है। अभी आप जानते हैं श्रावण का मास चल रहा है और हिंदू इसे बहुत पवित्र मानते हैं। मांसाहार करने वाले मांसाहार छोड़ देते हैं। शराब पीने वाले शराब छोड़ देते हैं। बहुत से लोग बाल नहीं कटाते हैं। कई प्रकार के व्रतों का पालन होता है। वह विषय धर्म जिस पर हम चर्चा करना चाहते हैं।
अस संसार में धर्म शब्द को सबसे अधिक विकृत करके समझाया गया है। आज चर्चा की जाती है संसार में बहुत सारे धर्म है जिसमें सब लोग यह दावा करते हैं कि उन्हीं का धर्म सर्वश्रेष्ठ है। और उनके धर्म के अतिरिक्त जितने भी धर्म है वह सभी निकृष्ट है। उनकी संसार को कोई आवश्यकता नहीं है। तो कुछ सेकुलरवादी कहते हैं कि नहीं सभी धर्म सच्चे और अच्छे हैं। सभी धर्म ईश्वर को प्राप्त कराते हैं। ईश्वर को प्राप्त कराने के मार्ग बताते हैं। जैसे सभी नदियां समुद्र में गिरती हैं। वैसे सभी धर्म ईश्वर की ओर ही जाते ले जाते हैं। इसलिए धर्म के नाम पर विवाद, हिंसा नहीं होना चाहिए। आज यह देखा जा रहा है कि जब भी धार्मिक नाम से मेलों का आयोजन होता है चाहे कुंभ मेले हो मुसलमानों का मेला हज यात्रा हो या और किसी भी मजहब के मेले लगते हो कहीं मंदिर का कार्यक्रम हो मस्जिद का कार्यक्रम हो चर्च का कार्यक्रम हो गुरुद्वारे का कार्यक्रम हो तो ऐसा लगता है जैसे एक धर्म की बाढ़ आ गई। समाचार पत्रों में छपता है आस्था का सैलाब उमड़ा।
धर्म का सैलाब उमड़ा। आचार्य चाणक्य ने कहा था सुखस मूलम धर्म। धर्म सुख का मूल है। अगर धर्म है तो सुख भी होगा। धार्मिक मेलों में बहुत भीड़ लगे। और फिर भी संसार में अशांति, भारत में अशांति, हमारे दिलों में अशांति, हमारे गांव में अशांति, देश में अशांति, दुनिया में शांति। इसका क्या कारण? इसका कारण आचार्य चाणक्य तो मिथ्या भाषण कर नहीं सकते। तब कहीं ना कहीं धर्म को हमने नहीं समझा। जिसको हम धर्म समझ रहे हैं। वह क्या धर्म है भी हिंदू अपने पर विचार करें, मुसलमान अपने पर विचार करें, ईसाई विचार करें, बौद्ध, जैन, सिख सभी विचार करें कि यहूदी विचार करें कि क्या जिसका वो पालन कर रहे हैं। क्या वो वास्तव में धर्म है? अगर धर्म होता तो सुख चैन होता संसार में। लेकिन वह आज कहीं भी नहीं।
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