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"कर्म ही धर्म है" यही सनातन धर्म का मूल मंत्र है | स्वामी सच्चिदानंद | Arya Sandesh TV Arya Samaj

“कर्म ही धर्म है” यही सनातन धर्म का मूल मंत्र है | स्वामी सच्चिदानंद | Arya Sandesh TV Arya Samaj

“कर्म ही धर्म है” यही सनातन धर्म का मूल मंत्र है | स्वामी सच्चिदानंद | Arya Sandesh TV Arya Samaj

तो बच्चों नेपोलियन बोनापार्ट का नाम आप लोगों ने सुना होगा। एक बड़ा योद्धा था वह। उसने एक बहुत अच्छी बात कही। वह कहता है जिस देश का धर्म नष्ट हो जाए, जिस देश की संस्कृति नष्ट हो जाए और जिस देश का इतिहास नष्ट हो जाए उस देश को नष्ट होने में ज्यादा समय नहीं लगता है। आज आप यदि चिंतन करें तो हमारे देश में इन तीनों पर ही ग्रहण लगा हुआ है। ना हमारा इतिहास बचा ना हमारा धर्म बचा और ना ही हमारी संस्कृति बची है।

वर्तमान में हम लोगों ने धर्म के नाम पर आडंबर तो समाज में बहुत खड़ा किया है। लेकिन वास्तव में धर्म क्या है? इसको समाज नहीं जान पाया। आज कुछ धार्मिक माफिया लोगों ने धर्म के नाम पर अपना व्यापार खड़ा किया समाज के अंदर। धर्म को धंधा बनाकर के अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उसका उपयोग किया गया है। लोगों ने बाहर से पैकिंग धर्म का धर्म की की है लेकिन अंदर लोग अपना माल भर के बेच रहे हैं। धर्म के नाम से बेच रहे हैं। ऐसी स्थिति में बहुत सारी जगह तो ऐसा भी मैंने देखा कि जब धार्मिक लोगों का व्यवहार समाज में अच्छा नहीं हुआ तो बहुत सारे लोगों को धर्म से ही घृणा हो गई। इसलिए मैं एक बात कहता हूं कि जो धार्मिक व्यक्ति होता है उसका जीवन बहुत पवित्र होना चाहिए। वह समाज का एक प्रेरणा प्रेरणा का स्रोत बनता है। आप लोगों ने कहानी सुनी होगी। आजकल तो वह शायद पुस्तक भी नहीं लग रही होगी और पुस्तक भी होगी तो वह कहानी हट गई होगी। लेकिन हम सभी ने अपने पाठ्य पुस्तकों में पढ़ी है बाबा भारती की कहानी। किस-किस बच्चे को याद है बाबा भारती की कहानी?

नए बच्चों को नहीं पता। पुराने लोगों को सबको पता होगी। पढ़ाई पहले पढ़ाई जाती थी। पहले पढ़ाई जाती बड़ी प्रेरणास्पद कहानी थी। एक बाबा भारती थे जो बड़े अच्छे संत थे। समाज की सेवा करते थे। उनके पास एक घोड़ा था। और एक सुल्ताना डाकू था। हां खड़क सिंह खड़क सिंह डाकू था। सुल्ताना नहीं खड़क सिंह। खड़क सिंह डाकू का उस घोड़े पर मन बहल गया। वह उस घोड़े को प्राप्त करना चाहता है। घोड़े की चोरी करना चाहता है। वह पुराना जमाना होता था। जैसे आजकल बड़ी-बड़ी गाड़ियां लोगों के पास में होती है ना पहले यह पशुधन सबसे बड़ी सौगात होती थी लोगों के पास में गो धन गज धन वाज धन और रतन धन खान है ना ये सारे रतन होते थे धन होते थे आजकल बड़ा आदमी कौन है जिसके पास में बड़ी-बड़ी गाड़ियां वो बड़ा आदमी है और पहले बड़ा आदमी कौन जिसके पास में ज्यादा पशु होते थे वो बड़ा आदमी हुआ करता था तो पहले संपत्ति हमारा पशुधन हुआ करता था तो बाबा भारती के पास में एक बहुत सुंदर घोड़ा था और उस घोड़े पर नजर लगी हुई थी डाकू खड़क सिंह की। अब खड़क सिंह उस घोड़े को प्राप्त करना चाहता। अब कैसे प्राप्त करें? वह चोर था, डाकू था।

उसके दिमाग में आईडिया आया कि यह बाबा वैसे तो मुझे घोड़ा नहीं देंगे। लेकिन बाबा से छल से घोड़ा लिया जाए। और उस व्यक्ति ने छल किया। बाबा भारती की प्रतिदिन की दिनचर्या थी। वह घोड़े से जो रास्ते से गुजरते थे तो वह जो डाकू खड़क सिंह था। वह रोगी का बहाना करके रोड पर बैठ गया। बाबा भारती संत थे।

पूरा पढ़ने के लिए नीचे दिए गए विडियो को देखे !

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