वैदिक काल में कैसे था मनुष्य ? l Vaidic Physics l Acharya Agnivrat
ओम यो भूत च भव्य च सर्वम यष्ट्याति स्वरस च केवलम तस्मै जेष्ठा ब्रह्मण नमः प्रिय श्रोताग आज हम इस विषय पर विचार करते हैं कि जब भारत व विश्व में वैदिक काल था उस समय यहां का मनुष्य कैसा था। इसके पूर्व आपने एक वीडियो हमारी देखी होगी कि प्रथम पीढ़ी कैसी थी उसकी चर्चा हम नहीं कर रहे। जब भूमंडल में सावी वेदों को मानते थे और वेदों के अनुसार जीवन जीते थे। उस समय मनुष्य कैसा था? उसका शरीर कैसा था?
उसका मन कैसा था? उसका आत्मा कैसा था? केवल इसी बिंदु पर हम चर्चा करेंगे। अगर इसका स्वरूप कुछ देखना है तो त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का राज्य पड़ सकती है। जिसमें वर्णित है कि उस समय संपूर्ण आर्यावर्त में कोई मनुष्य रोगी नहीं होता था। सभी बलवान और पुष्ट हुआ करते थे। क्यों हुआ करते थे? क्योंकि उनका आहार विहार यह वैदिक था। वेदों में जो आहार का वर्णन है वही आहार लिया करते थे। अर्थात संपूर्ण मानव जाति शाकाहारी थी और गो दुग्ध का पान करते थे। गोद संसार का सर्वश्रेष्ठ पेय पदार्थ है। अगर आप प्राकृतिक चिकित्सा में जाएंगे तो लगभग 60 रोगों का 60 रोगों की चिकित्सा केवल गो कल्प गो दुग्ध के कल्प से होती है।
कुछ चिकित्सा मट्ठा कल्प से होती है। आयुर्वेद में देखेंगे तो अनेक औषधियां गोघृ से बनाई जाती है। गो दुग्ध और फल यह प्रमुख आहार था और दुग्ध के साथ अन्य मक्खन दही आदि पूर्ण सात्विक भोजन था। फल और अनाज इन सब में पोषकता बहुत थी। तो संपूर्ण समाज फल, अनाज और गो दुग्ध आदि पदार्थों पर ही निर्भर था। और दूसरा आयुर्वेद में तीन स्वास्थ्य के स्तंभ बताए। आहार, निद्रा, ब्रह्मचर्य। ब्रह्मचर्य जो संतान उत्पन्न होती थी उसके माता-पिता भी ब्रह्मचारी हुआ करते थे। केवल संतति के लिए उनका शारीरिक संपर्क होता था। अन्य कोई उनका संपर्क नहीं होता था।
पूरा पढ़ने के लिए नीचे दिए गए विडियो को देखे !
