संविधान किस लिए बना है?
यह दो कानून आपके सामने दिख रहे होंगे। एक है माइनॉरिटी कमीशन एक्ट, एक है राइट टू एजुकेशन एक्ट। इन दोनों को हमने कोर्ट में चैलेंज किया हुआ है। हमारा यह कहना है कि भारत में माइनॉरिटी मेजॉरिटी का कांसेप्ट हो ही नहीं सकता। और यहां लीगल बैकग्राउंड के बहुत लोग बैठे हुए हैं। इसलिए आज इस विषय को टच करना बहुत जरूरी है। आज मैं भारत के सभी क्स्टिट्यूशनल एक्सपर्ट से पूछ रहा हूं कि भारत के संविधान के किस पन्ने के ऊपर मदरसा लिखा हुआ है?
भारत का संविधान तो मदरसा खोलने को अलाउ ही नहीं करता। संविधान की इंटरप्रिटेशन चार तरीके से होती है। लिटरल इंटरप्रिटेशन, परपोजिव इंटरप्रिटेशन, हारोनियस इंटरप्रिटेशन, कंस्ट्रक्टिव इंटरप्रिटेशन। एक पांचवा तरीका भी होता है जो भारत में नहीं होता है। हम कोशिश कर रहे हैं उसको इंप्लीमेंट करने के लिए। हमारे छोटे बेटे ने उसमें बड़ा अच्छा आर्टिकल भी लिखा है। कल्चरल इंटरप्रिटेशन। आप Google करिएगा कल्चरल इंटरप्रिटेशन ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन। नितिन उपाध्याय करके। छोटे बेटे ने उस भी उस पर काम शुरू किया है। हम एक पांचवा इंटरप्रिटेशन भी भारत में इस्टैब्लिश करना चाहते हैं।
कल्चरल इंटरप्रिटेशन। भारत के संविधान का आर्टिकल 27 कहता है कि रिलीजन को प्रमोट करने के लिए सरकार एक खर्च नहीं करेगी। मदरसा में मानवता प्रमोट होती है, ह्यूमैनिटी प्रमोट होती है या मजहब प्रमोट होता है? जोर से बोलिए जरा। संविधान का आर्टिकल 28 कहता है कि किसी भी सरकार के द्वारा मान्यता प्राप्त स्कूल में सरकार के द्वारा फंडेड स्कूल में कोई रिलीजियस टीचिंग नहीं होगी। मदरसों में सेुलर टीचिंग होती है या रिलीजियस टीचिंग होती है? जोर से बोलिए जरा। तो 27 का वायलेशन हुआ, 28 का वायलेशन हुआ। अब आते हैं जिसके नाम पे मदरसा चल रहा है। मदरसा चल रहा है आर्टिकल 30 के नाम पे। और आप लोगों के पास WhatsApp पे आता भी रहता होगा आर्टिकल 30 को बदला जाए। आर्टिकल 30 को ये किया जाए। अरे भैया आर्टिकल 30 को बदलने की जरूरत नहीं है।
आर्टिकल 30 की सही इंटरप्रिटेशन करने की जरूरत है। मेरे पास ये आर्टिकल 30 मैं खोल के बैठा हूं। आर्टिकल 30 खोल के देखिए। उसमें क्या लिखा हुआ है? उसमें लिखा है कि भारत के सभी नागरिकों को एजुकेशन इंस्टीट्यूशन खोलने का अधिकार है। रिलीजियस एजुकेशन इंस्टिट्यूशन नहीं।
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