Science Destroyed by Ankit Yadav? Philosophical Discourse on Methodology of Modern Science
चेतना आत्मा ये सब काम च एक टाइम प साइंटिफिक मेथड की पूजा कर रहे थे स सा ओ सांय नम यज में य चल रहा था मैं गया सानम ये अपने जो साइंस कम्युनिकेटर है व आपको पता नहीं ते अपने घर में गुफा में रहो अपना मैथमेटिक्स डिस्कवर कर लोगे और नवर करलो नहीं जाओ सिर्फ 20 साल उसी पर चिंतन करो हम तो आपके कहने का मतलब है कि जो चीज हम इंस्ट्रूमेंट से पता लगा रहे हैं वो कोई एक ऐसी मैथोलॉजी भी हो सकती है जो सिंपल पेड़ के नीचे बैठकर वो पता लगा हमें क्या पता आप इस बात को डिक्लाइन नहीं कर कर सकते कैसे मैं कैसे डिक्लाइन कर सकता हूं ज वो कह रहा है फिर तो आपको तो नहीं मिला कि वेदों में गणित का सूत्र लेकिन क्या हो अगर मैं यह कहूं कि इस प्रकार के दावे करने वाले लोग ही वैदिक संहिताओं से इतने दूर हैं !
कि उन्हें कभी वेद को खोलने का समय ही नहीं मिला। प्रमाण स्वरूप आज की यह वीडियो उन सभी लोगों के लिए रेवोल्यूशनरी हो सकती है जिन्हें यह लगता है कि वेदों में विज्ञान और गणित के दावे केवल इंटरप्रिटेशंस में होते हैं बल्कि मूल मंत्रों में कभी नहीं। जो लोग यह कहते हैं कि वास्तव में वेद मंत्रों में सीधी प्रत्यक्ष कहीं पर भी मैथमेटिक्स नहीं है उन्हें सीधा मंत्र तो उद्धृत करके आज हम दिखाएंगे ही। पर उससे पहले यह जान लेना बहुत आवश्यक है कि वेद के छह वेदांग जिनमें शिक्षा, कल्प, छंद, व्याकरण, ज्योतिष और निरुक्त में से एक ज्योतिष है जिसका सीधा संबंध मैथमेटिक्स से है और इसके लिए आपको वेदांग ज्योतिष ट्रेडिशन में रचे गए सूर्य सिद्धांत जैसे उत्कृष्ट और क्लिष्ट ग्रंथों को देखने की आवश्यकता भी नहीं है। यदि आप यजुर्वेद के याजुष ज्योतिष में आए इस श्लोक यथाशिखा मयुराणा नागा मणियो यथा तद्वद वेदांग शास्त्राणाम गणितम मुर्धनी संस्थितम पर विचार करें तो यहां सीधा स्पष्ट लिखा मिलता है कि जिस प्रकार शिखा का स्थान मोर पर मणि का स्थान नाग पर उसी प्रकार गणित का स्थान वेद वेदांगों में है। यानी गणित को वेद वेदांगों का सिरमोर कहा जा रहा है। और यहां हमारे तथाकथित वेद प्रेमी कह रहे हैं !
कि वेदों में विज्ञान और गणित कहना वेदों को स्पॉइल करने जैसा है। और यदि किसी को सीधा मंत्र संहिता से ही गणित देखने का शौक हो तो उसे यजुर्वेद के अध्याय 18 का मंत्र 24 तथा 25 देखना चाहिए। एका चमे पंचमे पंच चमे चमे [संगीत] हालांकि इन गणितीय मंत्रों में गढ़ संक्रियाएं भी हो सकती है। परंतु सामान्य अर्थमैटिक की दृष्टि से भी देखें !
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