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सृष्टि का संविधान l Vaidic Physics l Acharya Agnivrat

सृष्टि का संविधान l Vaidic Physics l Acharya Agnivrat

ओम [संगीत] यो भूत च भव्य च सर्वम यति स्वरस च केवलम तस्मै जेष्ठाय ब्रह्मण नमः प्रिय श्रोताग आज हम एक लंबे समय के पश्चात कुछ चर्चा कर रहे हैं। संसार का प्रत्येक प्राणी सदैव सुख ही चाहता है। हम यहां प्राणी की बात छोड़कर केवल मनुष्य जाति की बात करेंगे तो प्रत्येक मनुष्य भी सुख ही चाहता है। इसे संसार का सबसे बुद्धिमान विकसित प्राणी माना जाता है और है भी। इसने सुखी रहने के लिए अनेक नियम बनाए हैं। अनेक प्रकार से अपने ज्ञान का विस्तार किया है। विज्ञान का विस्तार किया है। जब से मनुष्य पैदा हुआ है तब से उसका यही प्रयास अनवरत चलता रहा है।

हम अपने देश की बात करें तो हमारे देश में विभिन्न विभागों के अंगों के अपने-अपने नियम है। वो नियम इसलिए बनाए ताकि उन नियमों पर चलकर हम सुखी रह सके। सबका कल्याण हो सके। प्रत्येक मनुष्य को उसके मौलिक अधिकार भी दिए। और उनको परिभाषित भी किया। अलग-अलग राज्यों के अपने कुछ पृथक नियम भी है। लेकिन मूल में भारत का संविधान है। उससे विपरीत किसी राज्य के किसी व्यक्ति के कोई नियम व अधिकार व कर्तव्य नहीं हो सकते।

ऐसा सब इसलिए ताकि सभी देशवासी सुखी और आनंदित रह सके और इसके लिए उसने विज्ञान का भी आश्रय लिया, तकनीक का भी आश्रय लिया और निरंतर इसमें प्रगति कर रहा है। जिस प्रकार से संविधान में निरंतर संशोधन हो रहे हैं, उसी प्रकार विज्ञान में भी निरंतर संशोधन हो रहे हैं। और संशोधित विज्ञान के आधार पर नई-नई टेक्नोलॉजी भी इस देश में आ रही है। वैसे ही प्रत्येक देश में हो रहा है। पाकिस्तान का अपना संविधान है। अफगानिस्तान का अपना संविधान है।

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